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राजस्थान में शातिर गैंग का भंडाफोड़! बैंक कागज़ात के फर्जीवाड़े से ठगे करोड़ों, पुलिस के हत्थे चढ़े 6 आरोपी

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राजस्थान में साइबर ठगी की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। जिसके चलते प्रदेश में कई अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल ही में डीडवाना पुलिस ने 3 ठगों को गिरफ्तार किया था। जिनके 11 एटीएम कार्ड और उनके खातों में करोड़ों का लेन-देन था। अब पुलिस ने फिर एक कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिसमें पुलिस ने देशभर से 36 करोड़ की साइबर ठगी की शिकायतें प्राप्त करने वाले गिरोह को पकड़ा है। कार्रवाई में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जिसमें गिरोह का मुख्य सरगना भी शामिल है। आरोपियों के पास से 7 बैंक पासबुक, दो एटीएम कार्ड और पांच मोबाइल फोन भी मिले हैं।

पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई

डीडवाना पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि साइबर सेल को संदिग्ध बैंक खातों की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक धरम पूनिया और थानाधिकारी राजेंद्र सिंह कमांडो के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई शुरू की। सूचना मिली थी कि पंकज मंडा अपने साथियों के साथ काले रंग की स्कॉर्पियो कार में साइबर ठगी की साजिश रच रहा है। पुलिस ने तुरंत छापा मारकर पंकज मंडा, समीर शेख, गिरधारी कड़वासरा, मोहम्मद शरीफ, शोहाफ खान और अरबाज खान को पकड़ लिया। भागने की कोशिश कर रहे आरोपियों को पुलिस ने घेरकर पकड़ लिया।

जानिए कैसे काम करता था गिरोह

पुलिस जाँच में पता चला कि यह गिरोह संगठित तरीके से काम करता था। आरोपी लोगों को कमीशन का लालच देकर या उन्हें झांसे में लेकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक और सिम कार्ड हासिल कर लेते थे। इसके बाद ठगी की रकम ऑनलाइन या स्कैनर के ज़रिए इन खातों में जमा करवा लेते थे। फिर एटीएम, चेक या ई-मित्र जैसे माध्यमों से पैसे निकालकर अपने सरगना को भेज देते थे। इस काम के बदले उन्हें कमीशन मिलता था। पुलिस ने बताया कि इनके खातों से जुड़ी 36 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी जाँच जारी है।

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