अहमदाबाद: गुजरात से कांग्रेस की एकमात्र लोकसभा सांसद गेनीबेन नागाजी ठाकोर ने राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर महाराष्ट्र की तर्ज पर गाय को ‘राज्यमाता’ घोषित करने की मांग की है। उन्होंने यह पत्र स्थानीय धार्मिक नेता देवनाथ बापू के समर्थन में लिखा है, जो बीते एक सप्ताह से इस मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। ठाकोर ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि गुजरात और कच्छ जिले के कई महंतों, साधुओं, राष्ट्रीय हिंदू संगठनों और बजरंग दल नेताओं की बैठक के बाद 159 विधायकों को पत्र लिखा गया था। परंतु कोई ठोस जवाब न मिलने पर देवनाथ बापू और कई साधुओं ने अनशन शुरू किया है। उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा सदस्य और कांग्रेस की नेता होने के नाते मैं आपसे अपील करती हूं कि महाराष्ट्र की तरह गुजरात में भी गाय को ‘राज्यमाता’ घोषित किया जाए।
महाराष्ट्र सरकार ने दिया है राज्यमाता का दर्जा
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर 2024 में राज्य की स्वदेशी गौ नस्लों को ‘राज्यमाता गोमाता’ का दर्जा दिया था। गुजरात कांग्रेस सांसद का कहना है कि इस मांग के पीछे कोई राजनीतिक या वैचारिक एजेंडा नहीं है, बल्कि यह केवल सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कांग्रेस का ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ एजेंडा नहीं है, बल्कि जनता की भावनाओं को देखते हुए की गई अपील है। देवनाथ बापू, जो एकलधाम से जुड़े हुए हैं, पिछले एक सप्ताह से कच्छ में अनशन पर हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा दिए जाने से न केवल धार्मिक भावनाओं को बल मिलेगा, बल्कि गौ संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
वहीं, इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है, तो दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस तरह की मांगों के जरिए ग्रामीण और पारंपरिक मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि गुजरात सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि इससे राज्य की राजनीति और धार्मिक विमर्श में नई हलचल पैदा हो सकती है।
महाराष्ट्र सरकार ने दिया है राज्यमाता का दर्जा
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर 2024 में राज्य की स्वदेशी गौ नस्लों को ‘राज्यमाता गोमाता’ का दर्जा दिया था। गुजरात कांग्रेस सांसद का कहना है कि इस मांग के पीछे कोई राजनीतिक या वैचारिक एजेंडा नहीं है, बल्कि यह केवल सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कांग्रेस का ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ एजेंडा नहीं है, बल्कि जनता की भावनाओं को देखते हुए की गई अपील है। देवनाथ बापू, जो एकलधाम से जुड़े हुए हैं, पिछले एक सप्ताह से कच्छ में अनशन पर हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि गाय को ‘राज्यमाता’ का दर्जा दिए जाने से न केवल धार्मिक भावनाओं को बल मिलेगा, बल्कि गौ संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
वहीं, इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बता रही है, तो दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस तरह की मांगों के जरिए ग्रामीण और पारंपरिक मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि गुजरात सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि इससे राज्य की राजनीति और धार्मिक विमर्श में नई हलचल पैदा हो सकती है।
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