श्री राधा रानी की लीलाओं का स्मरण बिना उनकी आठ प्रिय सखियों (अष्ट सखियों) के अधूरा है। ये सखियां केवल सहेलियां नहीं, बल्कि राधा जी की आत्मा का विस्तार कही जाती हैं। राधा-कृष्ण के हर उत्सव, श्रृंगार, रास और मिलन में अष्ट सखियों की विशेष भूमिका रहती है। इनका स्वभाव अलग-अलग है और यही विविधता प्रेम के इंद्रधनुष को पूर्ण करती है।
आइए जानते हैं राधा रानी की अष्ट सखियों के अद्भुत स्वरूप के बारे में—
1. ललिता देवीअष्ट सखियों में सबसे बड़ी और प्रमुख ललिता सखी हैं। वे सदैव राधा जी के पास रहतीं और उन्हें पान का बीड़ा अर्पित करतीं। ललिता देवी का स्वभाव गंभीर किंतु प्रेमपूर्ण था। वे राधा-कृष्ण के मिलन को सुगम बनातीं और कभी-कभी प्यारी शरारतों से वातावरण आनंदमय कर देतीं।
2. विशाखा देवीविशाखा सखी अपनी तेजस्विता और सौंदर्य के लिए विख्यात थीं। उनकी आभा बिजली जैसी मानी जाती है। वे राधा रानी को चंदन, कर्पूर और सुंदर वस्त्र अर्पित करतीं। त्योहारों और श्रृंगार को भव्य बनाने में उनकी भूमिका सबसे विशेष मानी जाती है।
3. चित्रा देवीचित्रा सखी का शरीर केसर के समान सुनहरी आभा लिए हुए था। वे हल्के रंग की साड़ी पहनतीं और राधा रानी का श्रृंगार करतीं। चित्रा की विशेषता थी कि वे बिना कहे राधा जी के मनोभाव को समझ जाती थीं और उसी अनुसार सेवा करती थीं।
4. इन्दुलेखा देवीइन्दुलेखा लाल साड़ी पहनतीं और सदा मुस्कुराती रहतीं। वे नृत्य और संगीत में निपुण थीं। उनकी मधुर वाणी से हर सभा आनंदमय हो जाती थी। इन्दुलेखा का हृदय सदैव राधा रानी को प्रसन्न करने में लगा रहता था।
5. चम्पकलता देवीचम्पकलता सखी अपनी सेवा भावना और मधुरता के लिए प्रसिद्ध थीं। वे सदैव राधा-कृष्ण की छोटी-छोटी आवश्यकताओं का ध्यान रखतीं। उनका कोमल और स्नेहमयी स्वभाव भक्तों के हृदय को भक्ति-रस से भर देता है।
6. रंगदेवीरंगदेवी सखी का स्वभाव हंसमुख और चंचल था। वे राधा-कृष्ण की लीलाओं में आनंद और रंग भर देतीं। विशेष रूप से होली और उत्सवों में रंगदेवी का महत्व सबसे अधिक होता था, क्योंकि वे प्रेम और उत्साह से रास-लीला को और भी मनोहर बना देती थीं।
7. तुंगविद्या देवीतुंगविद्या अपनी बुद्धिमत्ता और कला के लिए जानी जाती थीं। वे पीली साड़ी पहनतीं और संगीत में निपुण थीं। वे गोपियों को गीत, शास्त्र और ज्ञान से आनंदित करतीं। उनके कारण रास और उत्सवों का वातावरण और भी मधुर हो जाता था।
8. सुदेवी देवीसुदेवी मूंगे के रंग की साड़ी पहनती थीं। वे राधा जी को शुद्ध और ठंडा जल अर्पित करतीं। जल को पवित्र और निर्मल बनाने की विशेष विद्या उनमें थी। उनकी सादगी और निष्ठा के कारण वे राधा जी की अत्यंत प्रिय सखी थीं।
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